Sunday, December 28, 2025

दिग्विजय सिंह का 'सच': क्या कांग्रेस को आईना दिखा रहे हैं उनके अपने ही दिग्गज?

भारतीय राजनीति में दिग्विजय सिंह को अक्सर कांग्रेस का 'चाणक्य' माना जाता है, लेकिन उनके हालिया सोशल मीडिया पोस्ट ने खुद कांग्रेस की जड़ों में मट्ठा डालने का काम किया है। दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक पुरानी तस्वीर साझा की, जिसमें वे भाजपा और संघ के नेताओं के चरणों में बैठे नजर रहे हैं। इस तस्वीर के साथ उन्होंने जो लिखा, वह केवल भाजपा की तारीफ है, बल्कि राहुल गांधी और कांग्रेस की कार्यशैली पर एक तीखा कटाक्ष भी है।

संगठन की शक्ति और संघर्ष का सम्मान

दिग्विजय सिंह ने लिखा"RSS के जमीनी स्वयंसेवक और भाजपा के जमीनी कार्यकर्ता नेताओं के चरणों में बैठकर मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री बने... यही संगठन की शक्ति है।"

यह बयान केवल एक साधारण टिप्पणी नहीं है, बल्कि एक कड़वा सच है जिसे स्वीकार करने में कांग्रेस आलाकमान को दशकों लग गए। यह पोस्ट चीख-चीख कर कह रही है कि:

  • भाजपा और संघ में एक साधारण कार्यकर्ता भी अपनी मेहनत और समर्पण से शीर्ष तक पहुँच सकता है।
  • वहाँ पद 'विरासत' में नहीं मिलते, बल्कि 'तपस्या' से हासिल किए जाते हैं।

राहुल गांधी और 'पैराशूट' लीडरशिप पर प्रहार

दिग्विजय सिंह के इस पोस्ट को यदि गहराई से समझें, तो यह राहुल गांधी और कांग्रेस की दरबारी संस्कृति पर सबसे बड़ा हमला है। जहाँ एक तरफ मोदी जैसा जमीन से जुड़ा व्यक्ति संघर्ष कर प्रधानमंत्री बनता है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस में प्रतिभा के बजाय 'सरनेम' और 'करीबी' को प्राथमिकता दी जाती है।

  1. जमीनी स्तर बनाम बंगले की राजनीति: दिग्विजय सिंह अनजाने में ही सही, यह स्वीकार कर रहे हैं कि कांग्रेस के पास उस स्तर का कैडर और अनुशासन नहीं है जो जमीन से नेता पैदा कर सके।
  2. कार्यकर्ताओं की उपेक्षा: कांग्रेस में आज वह स्थिति है जहाँ निष्ठावान कार्यकर्ता खुद को ठगा हुआ महसूस करता है, क्योंकि उसे पता है कि शीर्ष पद केवल एक खास परिवार या उनके चहेतों के लिए सुरक्षित हैं।

क्या कांग्रेस अब केवल एक 'इवेंट' बनकर रह गई है?

जब कांग्रेस के ही बड़े नेता भाजपा के सांगठनिक ढांचे की प्रशंसा करने लगें, तो समझ जाना चाहिए कि जहाज डूब रहा है। राहुल गांधी की 'भारत जोड़ो यात्रा' या अन्य रैलियाँ केवल क्षणिक सुर्खियां बटोर सकती हैं, लेकिन वे उस 'संगठन की शक्तिका मुकाबला नहीं कर सकतीं, जिसका जिक्र दिग्विजय सिंह ने किया है।

दिग्विजय सिंह का यह पोस्ट कांग्रेस के लिए एक चेतावनी है। यह संदेश देता है कि जब तक पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र बहाल नहीं होगा और 'पैराशूट' नेताओं के बजाय जमीनी कार्यकर्ताओं को सम्मान नहीं मिलेगा, तब तक भाजपा के इस अभेद्य दुर्ग को भेद पाना असंभव है।

दिग्विजय सिंह ने अपनी पोस्ट से भाजपा को तो श्रेय दिया ही, लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान राहुल गांधी की उस छवि को पहुँचाया है जिसे चमकाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। सच तो यही है संगठन सेवा से बनता है, सत्ता की मलाई चाटने से नहीं।

- Abhijit

28/12/2025

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