Monday, December 1, 2025

ये कैसी ‘ड्राई स्टेट’ की होम मिनिस्ट्री? गृह मंत्री साहब, शराब का जवाब विपक्ष से नहीं, आपसे मांगा जा रहा है!

गुजरात के उप-मुख्यमंत्री और गृह मंत्री हर्ष संघवी का वह बयान, जिसमें उन्होंने अपनी सरकार की आँखों के सामने राज्य में धड़ल्ले से बिक रही अवैध शराब के लिए विपक्ष से सवाल पूछ लिया, सिर्फ शर्मनाक है, बल्कि गुजरात की पूरी शासन व्यवस्था की नाकामी का एक हास्यास्पद दस्तावेज है। क्या यह स्वीकारोक्ति नहीं है कि जिस कानून को लागू करने की जिम्मेदारी खुद उनकी पुलिस और उनके गृह विभाग की है, उसे लागू करने में वे पूरी तरह विफल रहे हैं? यह सवाल विपक्ष से नहीं, बल्कि सीधा जनता की ओर से गृह मंत्री साहब, आपकी जवाबदेही पर है।

सत्ता में आप हैं, जवाब कौन देगा?

गुजरात 'ड्राई स्टेट' है, यह केवल कागज़ों पर है। हकीकत यह है कि शराब की नदियां बह रही हैं। जहरीली शराब पीने से बार-बार मातम पसरता है, और नशा तस्करों का नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैला हुआ है। इन सबके लिए कौन जिम्मेदार है? इसका जवाब किसी गली के नुक्कड़ पर बैठा साधारण नागरिक भी दे सकता है: वह सरकार जो कानून लागू करवाने के लिए जिम्मेदार है।

जब गृह मंत्री, जो राज्य की पुलिस और कानून-व्यवस्था के सर्वोच्च मुखिया हैं, खुद ही विपक्ष से पूछते हैं कि 'गुजरात में शराब कौन ला रहा है?' तो यह मान लेना चाहिए कि उन्होंने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है। यह एक मंत्री का नहीं, बल्कि एक लाचार और दिशाहीन तंत्र का बयान लगता है। क्या वे विपक्ष की ओर इशारा करके यह बताना चाहते हैं कि गुजरात में शराबबंदी का कानून सिर्फ एक मज़ाक बनकर रह गया है, और इस खेल में सत्ताधारी पार्टी के लोग शामिल नहीं हैं?

'उड़ता गुजरात' की कड़वी सच्चाई

यह जगजाहिर है कि गुजरात में अवैध शराब का कारोबार हजारों करोड़ का है। यह बिना किसी उच्चस्तरीय राजनीतिक संरक्षण के चल ही नहीं सकता। आए दिन सरकारी गाड़ियों में शराब की तस्करी की खबरें सामने आती हैं, और पुलिस थानों से चंद कदम की दूरी पर अवैध अड्डे चलते हैं। यह दिखाता है कि शराबबंदी का कानून दरअसल भ्रष्टाचार का एक समानांतर तंत्र बन चुका है।

जब विपक्ष इस 'सिस्टम' पर सवाल उठाता है, तो मंत्री जी का ध्यान इसे ठीक करने पर नहीं, बल्कि सवाल को भटकाने और विपक्ष पर व्यक्तिगत हमला करने पर होता है। यह राजनीति नहींओछी चालबाज़ी है। मंत्री जी को याद रखना चाहिए कि ड्रग्स और अवैध शराब के खिलाफ लड़ाई में जनता उनके साथ है, लेकिन अगर वे कार्रवाई करने के बजाय खुद ही सवाल पूछने लगेंगे, तो जनता का भरोसा उठना स्वाभाविक है।

बन्द कीजिए यह दोषारोपण की राजनीति!

गृह मंत्री जी, यह दोषारोपण की सस्ती राजनीति बंद कीजिए। जनता को भाषण नहींसख्त कार्रवाई चाहिए। अगर आप वाकई इस सामाजिक बुराई को खत्म करना चाहते हैं, तो पहला कदम अपनी पुलिस और अपने विभाग में उन लोगों की जवाबदेही तय करना होगा जो इस अवैध कारोबार में लिप्त हैं।

अवैध शराब की एक भी बोतल यदि गुजरात में बिकती है, तो उसकी सीधी जिम्मेदारी आपके विभाग की है। जब तक आप पुलिस अधिकारियों को संरक्षण देना बंद नहीं करेंगे और तस्करों पर कड़ी कार्रवाई नहीं करेंगे, तब तक यह सवाल पूछने का आपका कोई नैतिक अधिकार नहीं है कि 'शराब के लिए जिम्मेदार कौन है?'

याद रखिए, आप सत्ता में हैंआप समाधान हैं, सवाल नहीं। या तो कानून लागू करें, या अपनी विफलता स्वीकार करें!

- Abhijit

01/12/2025

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