Thursday, December 11, 2025

भारतकूल: विरासत से भविष्य तक का सफ़र - चैप्टर 2 की आहट

एक नई सुबह की दस्तक: जब मीडिया बनता है संस्कृति का संवाहक

आधुनिकता की चकाचौंध में, हम अक्सर अपनी जड़ों को कहीं पीछे छोड़ आते हैं। लेकिन कुछ पहल ऐसी होती हैं, जो हमें रुककर सोचने पर मजबूर करती हैं कि हमारी विरासत, हमारी संस्कृति और हमारे देश की मूल भावना कितनी 'कमाल' और 'कूल' है। गुजरात मीडिया क्लब (GMC) द्वारा आयोजितभारतकूल’ (Bharatkool) ऐसा ही एक अभिनव प्रयास है। यह केवल एक इवेंट नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक उत्कृष्टता को समकालीन नज़रिए से देखने का एक मंच है।

और अब, इसी यात्रा का दूसरा और अधिक भव्य पड़ाव आने वाला है। मुझे यह बताते हुए अत्यंत गर्व और उत्साह हो रहा है कि गुजरात मीडिया क्लब 12 दिसंबर कोभारतकूल चैप्टर 2’ का शुभारंभ करने जा रहा है। यह आयोजन मीडिया, कला, संस्कृति और राष्ट्र-प्रेम के संगम को एक नए आयाम तक ले जाएगा। यह एक ऐसा अवसर है जहाँ 'भारत' की गरिमा और 'कूल' की आधुनिकता एक दूसरे से हाथ मिलाते हैं।

'भारतकूल' की मूल भावना: अपनी मिट्टी से जुड़ने की कला

'भारतकूल' शब्द अपने आप में एक दर्शन समेटे हुए है। यह मानता है कि भारतीय होना, अपनी परंपराओं का पालन करना, अपनी भाषाओं और कलाओं को महत्व देना, किसी भी पश्चिमी रुझान से ज़्यादा फैशनेबल और प्रेरक है। यह युवा पीढ़ी को संदेश देता है कि हमारी हजारों साल पुरानी सभ्यता में वह सब कुछ है, जो उन्हें वैश्विक मंच पर आत्मविश्वास के साथ खड़ा कर सकता है।

मीडिया, जो सूचना और विचारों का सबसे शक्तिशाली माध्यम है, इस भावना को जन-जन तक पहुँचाने में सबसे आगे रहा है। गुजरात मीडिया क्लब ने इस मंच के ज़रिए मीडिया बिरादरी को प्रेरित किया है कि वे सनसनीखेज़ खबरों से परे जाकर, उन कहानियों को भी उजागर करें जो भारत के गौरव, उसकी उद्यमशीलता और उसकी सांस्कृतिक विविधता को दर्शाती हैं। यह पहल मीडिया को केवल दर्शक नहीं, बल्कि एक सक्रिय भागीदार, एक 'संवाहक' बनाती है। यह हमारी राष्ट्रीय पहचान को एक आधुनिक, आकर्षक पैकेजिंग में प्रस्तुत करने की रणनीति है, ताकि यह हर वर्ग, विशेषकर युवा मन को अपील कर सके।

चैप्टर 1: स्मृतियों का कोलाज और सफल आगाज़

'भारतकूल' की नींव पिछले अध्याय, यानीभारतकूल चैप्टर 1’ में रखी गई थी। यह आयोजन एक शानदार सफलता थी और इसने साबित कर दिया कि देश की जड़ों से जुड़ने की इच्छा कितनी गहरी है।

यदि मुझे चैप्टर 1 के सार को परिभाषित करना हो, तो मैं कहूंगा कि इसका केंद्रीय विषय था 'डिजिटल युग में भारतीय कहानियां' या 'भारतीय कला और संस्कृति का पुनरुत्थान' इस अध्याय में, देश भर के प्रख्यात पत्रकारों, लेखकों, कलाकारों और सांस्कृतिक विशेषज्ञों ने शिरकत की थी।

मुख्य आकर्षण:

  1. 'स्थानीय के लिए मुखर' (Vocal for Local) पहल पर चर्चा: इस सत्र में इस बात पर ज़ोर दिया गया था कि कैसे मीडिया स्थानीय कलाकारों, कारीगरों और उद्यमियों की कहानियों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर लाकर उन्हें सशक्त बना सकता है।
  2. भारतीय भाषाओं में पत्रकारिता की चुनौतियाँ: एक महत्वपूर्ण पैनल डिस्कशन में क्षेत्रीय भाषाओं की पत्रकारिता के भविष्य और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उनकी बढ़ती प्रासंगिकता पर गहन विचार-विमर्श हुआ था।
  3. सांस्कृतिक प्रदर्शन: इस आयोजन में पारंपरिक और आधुनिक भारतीय कलाओं का एक अनूठा संगम देखने को मिला था। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से यह दर्शाया कि कैसे शास्त्रीय कला को समकालीन रंग में ढाला जा सकता है।

प्रभाव: ‘भारतकूल चैप्टर 1’ ने मीडिया बिरादरी के भीतर एक नई ऊर्जा का संचार किया। इसने उन्हें अपनी लेखन शैली और रिपोर्टिंग के विषयों में भारतीय मूल्यों और संस्कृति के प्रति अधिक संवेदनशील होने के लिए प्रेरित किया। इस पहले अध्याय ने एक मानक स्थापित किया कि कैसे एक मीडिया क्लब केवल पत्रकारिता तक सीमित रहकर, राष्ट्र-निर्माण के सांस्कृतिक आयामों में भी सक्रिय भूमिका निभा सकता है।

चैप्टर 2: भविष्य की ओर एक महत्वाकांक्षी कदम (12 दिसंबर का इंतज़ार)

अब बारी हैभारतकूल चैप्टर 2’ की, जिसका आयोजन 12 दिसंबर को होने जा रहा है। पहला अध्याय जहाँ नींव थी, वहीं यह दूसरा अध्याय उस इमारत को एक नई ऊँचाई देगा।



ऐसा माना जा रहा है किभारतकूल चैप्टर 2’ का फोकस एक अधिक व्यापक और वैश्विक विषय पर केंद्रित होगा, जैसे कि 'मीडिया के माध्यम से भारत की सॉफ्ट पावर का विस्तार' या 'आज़ादी के 100 साल: मीडिया का विज़न' यह विषय भारत की बढ़ती वैश्विक उपस्थिति और मीडिया की जिम्मेदारी को रेखांकित करेगा।

चैप्टर 2 में क्या है ख़ास:

  1. वैश्विक संदर्भ में भारतीय पहचान: इस सत्र में दुनिया भर के ऐसे भारतीय मूल के मीडिया दिग्गजों को आमंत्रित किए जाने की संभावना है, जो बताएँगे कि कैसे भारत की कहानी को अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर और प्रभावी ढंग से पेश किया जा सकता है। यह 'वसुधैव कुटुंबकम्' के विचार को मीडिया के लेंस से देखने का प्रयास होगा।
  2. तकनीक और भारतीय संस्कृति का मिलन: एक विशेष कार्यशाला (workshop) 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और भारतीय कला' पर केंद्रित हो सकती है, जहाँ विशेषज्ञ चर्चा करेंगे कि कैसे नई तकनीकें (जैसे AI और मेटावर्स) हमारी प्राचीन कलाओं और ज्ञान को संरक्षित और प्रचारित करने में मदद कर सकती हैं।
  3. युवा पत्रकारों के लिए मार्गदर्शन: इस अध्याय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा युवा और नवोदित पत्रकारों को समर्पित होगा। उन्हें बताया जाएगा कि कैसे वे अपनी पत्रकारिता में सटीकता, निष्पक्षता के साथ-साथ राष्ट्रीय गर्व और सांस्कृतिक जिम्मेदारी को भी शामिल कर सकते हैं। यह सत्र उन्हें 'समाचार' और 'सरोकार' के बीच संतुलन बनाना सिखाएगा।
  4. उच्च-स्तरीय भागीदारी: इस वर्ष राजनीतिक, कॉर्पोरेट और सांस्कृतिक जगत की कई जानी-मानी हस्तियों के शामिल होने की उम्मीद है, जिससे मंच की गंभीरता और प्रासंगिकता और भी बढ़ जाएगी।

भारतकूल चैप्टर 2’ केवल बातें करने का मंच नहीं है, बल्कि यह भविष्य के लिए एक रोडमैप तैयार करने का प्रयास है। यह मीडिया बिरादरी को यह याद दिलाता है कि उनकी कलम और कैमरा सिर्फ खबरें ही नहीं दिखाते, बल्कि वे इतिहास को गढ़ने का भी काम करते हैं।

गुजरात मीडिया क्लब का अभिनव नेतृत्व

गुजरात मीडिया क्लब (GMC) ने इस पहल के माध्यम से अपनी दूरदर्शिता का परिचय दिया है। सामान्यतः मीडिया क्लब केवल पत्रकारों के हितों और नेटवर्किंग तक सीमित रहते हैं, लेकिन GMC ने एक कदम आगे बढ़कर खुद को संस्कृति, समाज और राष्ट्र के प्रति जवाबदेह ठहराया है।भारतकूलके आयोजन से यह सिद्ध होता है कि रचनात्मकता और राष्ट्रप्रेम के संयोजन से कितने प्रभावशाली परिणाम सामने सकते हैं। 12 दिसंबर का यह आयोजन एक बार फिर यह साबित करेगा कि जब मीडिया सकारात्मक ऊर्जा के साथ एकजुट होता है, तो वह समाज को किस दिशा में ले जा सकता है।

इंतज़ार की घड़ियाँ समाप्त

भारतकूल चैप्टर 1’ की सफलता के बाद, ‘भारतकूल चैप्टर 2’ से अपेक्षाएँ बहुत ऊँची हैं। यह केवल गुजरात की मीडिया बिरादरी के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक इवेंट बनने जा रहा है। यह हमें फिर से याद दिलाएगा कि हमारी संस्कृति, हमारा इतिहास और हमारी पहचान ही हमारी सबसे बड़ी 'कूल' पूंजी है।

12 दिसंबर को गुजरात मीडिया क्लब का यह अनूठा प्रयास, हमें एक बार फिर अपनी जड़ों से जुड़ने और भविष्य की ओर एक सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ देखने का मौका देगा। मीडिया बिरादरी, छात्रों और संस्कृति प्रेमियों को इस इवेंट का हिस्सा ज़रूर बनना चाहिए। यह सिर्फ एक सम्मेलन नहीं, यह 'नए भारत' की कहानी कहने का एक नया तरीका है।

आइए, हम सब मिलकर इस भारतकूल आंदोलन को आगे बढ़ाएँ!

- Abhijit

11/12/2025

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