जैसे-जैसे 2025 का सूरज अस्त हो रहा है, भारत एक ऐसी दहलीज पर खड़ा है जहाँ गर्व करने के लिए उपलब्धियां भी हैं और भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी भी। यह साल भारत के लिए केवल कैलेंडर का एक पन्ना नहीं, बल्कि उसकी 'रणनीतिक स्वायत्तता' और आर्थिक लचीलेपन की अग्निपरीक्षा का वर्ष रहा है।
2025: उपलब्धियों और उतार-चढ़ाव का साल
1. आर्थिक शक्ति का नया केंद्र: 2025 भारत के लिए आर्थिक मोर्चे पर ऐतिहासिक रहा। हमने जापान को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का गौरव हासिल किया। 8.2% की जीडीपी वृद्धि दर (Q2 FY26) और 1% से भी नीचे गिरी महंगाई दर ने भारतीय अर्थव्यवस्था को एक 'गोल्डिलॉक्स पीरियड' में ला खड़ा किया है। जीएसटी 2.0 और आयकर सुधारों ने मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति को बढ़ाया है।
2. कूटनीतिक चुनौतियां और सैन्य मुस्तैदी:
वैश्विक पटल पर यह साल अस्थिर रहा। अमेरिका में सत्ता परिवर्तन और ट्रंप प्रशासन की 'टैरिफ वॉर' ने भारतीय निर्यातकों को पसीने ला दिए। पड़ोसी देशों में उथल-पुथल, विशेषकर बांग्लादेश और नेपाल के बदलते समीकरणों ने भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति का कड़ा इम्तिहान लिया। मई 2025 में पहलगाम हमले के बाद भारत के ऑपरेशन सिंदूर ने स्पष्ट कर दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं होगा।
3. खेल और संस्कृति का संगम:
प्रयागराज महाकुंभ 2025 ने जहाँ भारत की सांस्कृतिक सॉफ्ट पावर का लोहा मनवाया, वहीं खेल के मैदान पर भारतीय महिला क्रिकेट टीम का 50-ओवर विश्व कप जीतना और पुरुष टीम की चैंपियंस ट्रॉफी की सफलता ने करोड़ों भारतीयों को गौरव के क्षण दिए।
2026: क्या हैं भारत के सामने बड़ी चुनौतियां?
आने वाला साल 2026 भारत के लिए एक 'महत्वपूर्ण मोड़' साबित होगा। जहाँ एक ओर उम्मीदें हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसी चुनौतियां हैं जिनसे निपटना आसान नहीं होगा:
- भू-राजनीतिक संतुलन:
2026 में भारत को अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव के बीच अपनी राह बनानी होगी। अमेरिका द्वारा लगाए जा रहे टैरिफ और रूस-यूक्रेन-इजरायल जैसे संघर्षों के बीच तेल की कीमतों को स्थिर रखना एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती होगी।
- जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाएं: 2025 में हमने देखा कि बेमौसम बारिश और भूस्खलन ने अर्थव्यवस्था को चोट पहुँचाई। 2026 के लिए विशेषज्ञों ने 'अत्यधिक मौसम घटनाओं' (Extreme Weather
Events) की चेतावनी दी है। कृषि प्रधान देश होने के नाते,
मानसून की अनिश्चितता हमारी खाद्य सुरक्षा के लिए बड़ा जोखिम है।
- तकनीकी बेरोजगारी और कौशल विकास: भारत भले ही ग्लोबल टैलेंट हब बन रहा है, लेकिन AI
के तेजी से बढ़ते प्रभाव के कारण पारंपरिक नौकरियों पर संकट मंडरा रहा है। 2026 में सबसे बड़ी चुनौती करोड़ों युवाओं को नई तकनीक के अनुरूप 'अपस्किल' करने की होगी।
- आंतरिक सुरक्षा और राजनीतिक बदलाव: 2026 में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, जो देश की राजनीतिक दिशा तय करेंगे। इसके साथ ही, पड़ोसी देशों से होने वाली घुसपैठ और साइबर हमलों के बढ़ते खतरे आंतरिक सुरक्षा के लिए सिरदर्द बने रहेंगे।
कुल मिलाकर, 2025
ने भारत को आत्मविश्वास दिया है, तो 2026 उसे सतर्क रहने का संदेश दे रहा है। भारत अब केवल एक दर्शक नहीं, बल्कि वैश्विक एजेंडा तय करने वाला खिलाड़ी है। क्या हम 2026 में अपनी इस गति को बरकरार रख पाएंगे? यह काफी हद तक हमारी आंतरिक एकता और बदलती वैश्विक व्यवस्था के प्रति हमारे लचीलेपन पर निर्भर करेगा।
- Abhijit
31/12/2025