
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने अपने मंत्रिमंडल और शीर्ष अधिकारियों के साथ वलसाड में आयोजित ‘चिंतन शिविर’ के लिए ‘वंदे भारत’ ट्रेन से यात्रा की। यह प्रतीकात्मक कदम देखने में अच्छा लगा—सत्ता के शीर्ष लोगों का सामान्य ट्रेन यात्रा चुनना, यह दर्शाता है कि प्रशासन आम नागरिक के करीब है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह यात्रा सिर्फ एक महंगा ‘दिखावा’ थी, या सचमुच ‘जन-केंद्रित’ शासन की शुरुआत?
अहमदाबाद रेलवे
स्टेशन पर जो घटनाक्रम सामने आया, वह इस पूरी प्रतीकात्मकता
पर एक स्याह धब्बा लगाता है।
लोकतंत्र में VIP
कल्चर का नया संस्करण
खबरों के
अनुसार, मुख्यमंत्री और उनके लाव-लश्कर के स्टेशन पहुंचने और ट्रेन
में सवार होने के दौरान, अहमदाबाद रेलवे स्टेशन (जो पहले से ही नवीनीकरण के काम
के कारण अस्त-व्यस्त है) पर सामान्य यात्रियों को रोक दिया गया। उन्हें प्लेटफार्म
पर जाने से मना किया गया,
जिससे आम जनता को भारी असुविधा और परेशानी का सामना करना
पड़ा।
यह कृत्य घोर
निंदनीय है, और सीधे तौर पर उस लोकतांत्रिक
भावना का उल्लंघन है जिसके तहत हमारे नेता ‘जन-सेवक’ कहलाते हैं।
सबसे बड़ी विसंगति यह है कि सुबह मुंबई जाने
वाली वंदे भारत ट्रेन का वलसाड में नियमित स्टॉपेज नहीं है। वंदे भारत एक प्रीमियम,
समयबद्ध और
हाई-स्पीड सेवा है, जिसकी पहचान ही उसकी गति और निश्चित समय-सारणी है। यदि किसी
नियमित स्टॉपेज वाली ट्रेन को भी प्रोटोकॉल के चलते रोका या धीमा किया जाता है,
तो यह
सीधा-सीधा रेलवे के नियमों और हजारों यात्रियों के समय का उल्लंघन है। लेकिन यहाँ
तो पूरी व्यवस्था को झुका दिया गया।
सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम (चिंतन शिविर,
जिसका उद्देश्य
‘विकसित गुजरात’ का रोडमैप तैयार करना है) में शामिल होने के लिए एक ट्रेन के
शेड्यूल में बड़ा बदलाव किया गया, उसे एक गैर-नियमित स्टॉप पर रोका गया। यह कार्रवाई उन
सैकड़ों यात्रियों के लिए सरासर अन्याय है जिन्होंने इस प्रीमियम सेवा को उसकी गति
और समय की पाबंदी के लिए चुना था। उनका समय, उनकी योजनाएँ, सब कुछ एक झटके
में 'सरकारी सुविधा' के नाम पर दरकिनार कर दिया गया।
जब एक
जन-प्रतिनिधि, जो स्वयं को आम आदमी के बीच दिखाने के लिए ‘वंदे भारत’ जैसी
ट्रेन चुनता है, तो उसी समय उसके सुरक्षा प्रोटोकॉल के नाम पर सैकड़ों
यात्रियों को उनके मूलभूत अधिकार—बिना रुकावट यात्रा करने के अधिकार—से वंचित कर
दिया जाता है, तो यह स्पष्ट विरोधाभास है। यह प्रतीकात्मकता नहीं, बल्कि पाखंड है।
चिंतन शिविर या ‘सामंती सोच’ का प्रदर्शन?

सीएम जिस यात्रा को ‘सामूहिक चिंतन से सामूहिक विकास’ की थीम से जोड़कर वलसाड जा रहे थे, उस चिंतन शिविर की नींव ही अहमदाबाद स्टेशन पर आम जनता को परेशान करके रखी गई। क्या यह प्रशासन यह ‘चिंतन’ कर रहा था कि आम यात्री स्टेशन पर कितनी देर तक असुविधा झेल सकता है?
यह स्पष्ट रूप
से दर्शाता है कि सत्ता के गलियारों में बैठे लोगों की मानसिकता आज भी नहीं बदली
है। भले ही वे सरकारी गाड़ी छोड़कर ट्रेन में बैठ जाएं, लेकिन उनकी ‘सामंती सोच’ – जहाँ उनका समय और सुविधा आम जनता से कहीं अधिक
मूल्यवान है – उन्हें मजबूर करती है कि वे अपने लिए रास्ते साफ कराएं और
प्लेटफार्म खाली कराएं। यह ‘जन-सेवक’ का नहीं, बल्कि ‘शासक’ का रवैया है।
आज जब देश
डिजिटलाइज़ेशन और सुगम शासन की ओर बढ़ रहा है, तब भी हमारे प्रतिनिधियों
को यह वीआईपी प्रोटोकॉल क्यों चाहिए? क्या उन्हें यह डर है कि एक
आम यात्री उनसे कोई सवाल पूछ लेगा, या उनकी सुरक्षा इतनी कमज़ोर
है कि स्टेशन पर मौजूद यात्रियों के बीच से निकल नहीं सकते?
नैतिक और कानूनी प्रश्न
यह घटना केवल
असुविधा का मामला नहीं है,
यह नैतिक और कानूनी दोनों तरह के प्रश्न खड़े करती है:
- नैतिकता: एक जन-प्रतिनिधि होने के नाते, आपकी प्राथमिकता आम जनता की सुविधा होनी चाहिए। आपका
आगमन उनके लिए समस्या क्यों बना?
- कानून: सार्वजनिक परिवहन के उपयोग के दौरान वीआईपी प्रोटोकॉल
के नाम पर ट्रेन को अनावश्यक रूप से रोकना या यात्रियों के आवागमन को बाधित
करना, क्या यह अपने पद का दुरुपयोग नहीं है?
मुख्यमंत्री
भूपेंद्र पटेल जी, ‘चिंतन शिविर’ में जाने से पहले आपको इस बात पर ‘आत्म-चिंतन’
करना चाहिए था कि आपका एक मिनट का राजनीतिक प्रदर्शन, स्टेशन पर खड़े हज़ारों यात्रियों के लिए कितनी परेशानी लेकर आया। जब आपकी
यात्रा ही आम आदमी की कीमत पर शुरू हो, तो आपके ‘सामूहिक विकास’ के
संकल्प पर भरोसा कैसे किया जा सकता है?
अब समय आ गया
है कि ‘वीआईपी कल्चर’ के नाम पर आम नागरिक को मिलने वाली हर असुविधा पर कड़ा रुख
अपनाया जाए। सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों को यह समझना होगा: वे मालिक नहीं, बल्कि वेतनभोगी सेवक हैं। और सेवक
की सुविधा के लिए मालिक को इंतजार नहीं करना पड़ता। यह प्रथा बंद होनी चाहिए। तुरंत।
- Abhijit
29/11/2025
Very True and it is the high time this so called VVIP's Stop this nonsense behaviour.
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