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| (फोटो सौजन्यः NSUI) |
गुजरात, जो कभी अपनी अस्मिता, व्यापारिक कौशल और गांधी के आदर्शों के लिए जाना जाता था, आज एक भयावह पहचान की ओर धकेला जा रहा है। वह पहचान है - 'ड्रग्स की मंडी'। राज्य के बंदरगाहों से लेकर गलियों तक नशीले पदार्थों का जो जाल बिछा है, उसने आज हमारे भविष्य यानी युवाओं को अपने शिकंजे में ले लिया है। इस गंभीर संकट के खिलाफ और सोती हुई सत्ता को जगाने के लिए कांग्रेस की छात्र इकाई, NSUI, शुक्रवार, 2 जनवरी से पूरे प्रदेश में एक निर्णायक अभियान शुरू करने जा रही है।
लेकिन सवाल यह है कि आखिर हमें इस स्थिति तक पहुँचाया किसने?
'उड़ता गुजरात': एक कड़वी हकीकत
पिछले कुछ वर्षों में मुंद्रा और कांडला जैसे बंदरगाहों से हजारों करोड़ रुपये की ड्रग्स पकड़ी गई है। सरकार इसे अपनी 'सफलता' बताकर पीठ थपथपाती है, लेकिन सच तो यह है कि जो पकड़ा गया वह सिर्फ बर्फ के पहाड़ की नोक है। असली दर्द उन घरों में है जहाँ का चिराग नशे के अंधेरे में बुझ रहा है। अहमदाबाद से लेकर सूरत और राजकोट तक, ड्रग्स आज किराने की दुकान की तरह सुलभ है। क्या यह संभव है कि इतना बड़ा तंत्र पुलिस और प्रशासन की नाक के नीचे बिना किसी राजनीतिक संरक्षण के चल रहा हो?
गुजरात पुलिस और सरकार की विफलता
गुजरात पुलिस का खुफिया तंत्र आखिर कहाँ सोया हुआ है? जब NSUI के कार्यकर्ता सड़कों पर उतरते हैं, तो पुलिस उन्हें रोकने में पूरी ताकत लगा देती है, लेकिन वही मुस्तैदी ड्रग पेडलर्स और बड़े माफियाओं को पकड़ने में क्यों नहीं दिखती?
राज्य सरकार 'नशा मुक्त गुजरात' के खोखले वादे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि युवा आज बेरोजगारी और हताशा के कारण इस दलदल में फंस रहे हैं। सरकार डेटा और आंकड़ों के खेल में व्यस्त है, जबकि ड्रग माफिया हमारे स्कूलों और कॉलेजों के बाहर अपना जाल फैला चुके हैं।
NSUI का अभियान: अब चुप रहने का वक्त नहीं
2 जनवरी से शुरू होने वाला NSUI का यह अभियान महज एक राजनीतिक विरोध नहीं है, बल्कि यह हर उस माँ की पुकार है जिसका बेटा नशे की भेंट चढ़ गया। यह अभियान पुलिस की उस कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान है जो रसूखदारों के आगे नतमस्तक है।
NSUI मांग करती हैं कि:
- ड्रग्स तस्करी के बड़े मगरमच्छों पर कड़ी कार्रवाई हो,
न कि सिर्फ छोटे मोहरों पर।
- शिक्षण संस्थानों के आसपास पुलिस की गश्त बढ़ाई जाए और संदिग्ध गतिविधियों पर सख्त रोक लगे।
- सरकार इस मुद्दे पर एक 'श्वेत पत्र' जारी करे कि पिछले 5
वर्षों में कितनी ड्रग्स राज्य में घुसी और कितने बड़े अपराधियों को सजा हुई।
गुजरात की जनता अब और बर्दाश्त नहीं करेगी। यदि सरकार और पुलिस ने अब भी अपनी आंखें नहीं खोलीं, तो NSUI का यह आंदोलन सड़कों से लेकर विधानसभा तक गूंजेगा। हमारे युवाओं का भविष्य दांव पर है, और हम इसे ड्रग माफियाओं और निकम्मे प्रशासन की भेंट नहीं चढ़ने देंगे।
जागो गुजरात, अपने भविष्य को बचाओ!
- Abhijit

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