Sunday, January 4, 2026

जनहित बनाम राजनीतिक दिखावा: क्या जनता के टैक्स का पैसा फूलों की नुमाइश के लिए है?

अहमदाबाद, जो कभी अपनी सादगी और व्यापारिक सूझबूझ के लिए जाना जाता था, आज एक ऐसी विडंबना का केंद्र बन गया है जहाँ नागरिकों की बुनियादी जरूरतें फाइलों में दफन हैं और सड़कों पर करोड़ों के फूल बिछाए जा रहे हैं। गुजरात की भूपेंद्र पटेल सरकार और अहमदाबाद नगर निगम (AMC) के हालिया 'फ्लावर शो' के आयोजन ने एक गंभीर बहस को जन्म दे दिया है: क्या यह विकास है या जनता की मेहनत की कमाई का क्रूर मज़ाक?

दिखावे की राजनीति और 20 करोड़ का 'गुलदस्ता'

खबरों के मुताबिक, इस साल फ्लावर शो के नाम पर लगभग 20 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। साबरमती रिवरफ्रंट पर सजे ये फूल उन आँखों को सुहावने लग सकते हैं जिन्हें शहर की बदहाल सड़कें, उफनते गटर और बुनियादी सुविधाओं का अभाव नहीं दिखता।

हैरानी की बात यह है कि जहाँ एक तरफ मध्यमवर्गीय परिवार महंगाई और टैक्स की मार झेल रहा है, वहीं नगर निगम उसी टैक्स के पैसे को महज कुछ दिनों की राजनीतिक वाहवाही और नेताओं को खुश करने के लिए पानी की तरह बहा रहा है। क्या इन करोड़ों रुपयों से शहर के उन इलाकों की सूरत नहीं बदली जा सकती थी जहाँ आज भी पीने के साफ पानी की किल्लत है?

बुनियादी सुविधाओं पर 'ग्रहण'

अहमदाबाद के कई इलाकों में आज भी जलभराव एक स्थायी समस्या है। मॉनसून में शहर 'वेनिस' बन जाता है, सड़कें गड्ढों का पर्याय बन जाती हैं, लेकिन प्रशासन के पास उन गड्ढों को भरने के लिए फंड की कमी का रोना हमेशा तैयार रहता है। परंतु, जब बात 'फ्लावर शो' या वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की आती है, तो खजाना रातों-रात खुल जाता है।

प्रश्न यह है कि क्या जनता ने आपको इसलिए चुना था कि आप उनके स्वास्थ्य और शिक्षा के बजट को काटकर 'सेल्फी पॉइंट' तैयार करें?

सरकार की जवाबदेही कहाँ है?

भूपेंद्र पटेल सरकार को यह समझना होगा कि राज्य केवल उत्सवों से नहीं, बल्कि संतुष्ट नागरिकों से चलता है। जनता ने आपको सेवा के लिए चुना है, अपने ही पैसों की बर्बादी देखने के लिए नहीं। फ्लावर शो के नाम पर करोड़ों के टेंडर जारी करना और उसमें भ्रष्टाचार की बू आना अब गुजरात की प्रशासनिक संस्कृति का हिस्सा बनता जा रहा है।

अहमदाबाद की जनता अब यह सवाल पूछ रही है:

  • क्या हमारे बच्चों का भविष्य इन मुरझा जाने वाले फूलों से ज्यादा कीमती नहीं है?
  • क्या बदहाल स्वास्थ्य सुविधाओं को ठीक करना इस 'दिखावे' से ज्यादा जरूरी नहीं था?

कब तक जनता की गाढ़ी कमाई को राजनीतिक खुशामद की भेंट चढ़ाया जाएगा?

राजनीतिक चाटुकारिता का चरम

यह बेहद निंदनीय है कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की सरकार और AMC प्रशासन जन-सुविधाओं के बजाय ऐसे आयोजनों को प्राथमिकता दे रहे हैं जो केवल विज्ञापनों और Photo-op के काम आते हैं। गिनीज बुक में नाम दर्ज कराना गर्व की बात हो सकती है, लेकिन वह गर्व तब फीका पड़ जाता है जब शहर का आम आदमी ट्रैफिक जाम, प्रदूषण और खराब स्वास्थ्य सेवाओं से जूझ रहा हो।

नेताओं को खुश रखने की इस होड़ ने लोकतंत्र के 'लोक' को हाशिए पर धकेल दिया है। प्रशासन को यह याद रखने की जरूरत है कि वह जनता का 'ट्रस्टी' है, मालिक नहीं। 20 करोड़ रुपये की यह फूलों की प्रदर्शनी उन लोगों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है जो अपनी जायज मांगों के लिए निगम के चक्कर काट-काट कर थक चुके हैं।

वक्त गया है कि अहमदाबाद की जनता सरकार से हिसाब मांगे। हमें फूलों की खुशबू से ज्यादा साफ हवा, चिकनी सड़कों और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन की जरूरत है। यदि भूपेंद्र पटेल सरकार वास्तव में 'अंत्योदय' में विश्वास रखती है, तो उसे यह फिजूलखर्ची तुरंत रोककर पैसा जनहित के कार्यों में लगाना चाहिए।

फूल तो कल मुरझा जाएंगे, लेकिन जनता के आक्रोश की आग इतनी जल्दी नहीं बुझेगी।

- Abhijit

04/01/2026