Monday, February 23, 2026

भारत मंडपम में विरोध: 'नग्न' राजनीति और सत्ता का अहंकार

20 फरवरी, 2026 को दिल्ली का भारत मंडपम एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में था। मौका था 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' का, जिसे सरकार भारत की तकनीकी शक्ति के प्रदर्शन के रूप में देख रही थी। लेकिन इसी बीच भारतीय युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने हॉल नंबर 5 में प्रवेश कर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और बेरोजगारी के खिलाफ शर्टलेस विरोध प्रदर्शन किया। इस घटना ने भारतीय राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है, जिसने केवल सत्ता पक्ष की सहनशीलता की पोल खोल दी है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के दोहरे चरित्र को भी उजागर किया है।

रविवार, 22 फरवरी को मेरठ में रैपिड-मेट्रो रेल के उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने इस विरोध प्रदर्शन को 'गंदी और नंगी राजनीति' करार दिया। उन्होंने कहा, "मैं कांग्रेसियों से पूछता हूंदेश जानता है कि आप पहले से ही नंगे हैं, फिर कपड़े उतारने की क्या जरूरत थी?" एक प्रधानमंत्री के पद पर बैठे व्यक्ति से ऐसे शब्दों की अपेक्षा शायद ही कोई लोकतंत्र करता हो। लेकिन सवाल यह नहीं है कि कांग्रेस ने विरोध क्यों किया; सवाल यह है कि भाजपा इस विरोध को 'भारत की छवि धूमिल करने' का नाम देकर क्यों चिल्ला रही है?

छवि की राजनीति और असली सवाल

भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस ने विदेशी मेहमानों के सामने भारत की छवि को नुकसान पहुंचाया है। लेकिन क्या वास्तव में एक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन (चाहे उसका तरीका कुछ भी हो) देश की छवि खराब करता है, या फिर वह 'प्रोपगेंडा' जिसे सरकार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बेचना चाहती है? भारत एक जीवंत लोकतंत्र है, और लोकतंत्र की खूबसूरती ही यह है कि यहाँ असहमति के स्वर गूँजते हैं। यदि विदेशी प्रतिनिधि भारत आते हैं, तो उन्हें यह भी देखना चाहिए कि यहाँ का युवा अपनी नौकरियों और देश के संसाधनों के 'सौदागरों' से नाराज है।

प्रधानमंत्री ने मेरठ में कांग्रेस को वैचारिक रूप से 'कंगाल' बताया। लेकिन क्या भाजपा भूल गई है कि जब वह विपक्ष में थी, तब उसने तत्कालीन प्रधानमंत्रियों के खिलाफ किस तरह के प्रदर्शन किए थे? काले झंडे दिखाना, पुतले फूंकना और संसद की कार्यवाही ठप करना भाजपा की कार्यशैली का हिस्सा रहा है। उस समय क्या 'देश की छवि' अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दांव पर नहीं थी? असल में, जब भाजपा विरोध करती है तो वह 'राष्ट्रवाद' होता है, और जब विपक्ष सवाल उठाता है तो वह 'देशद्रोह' बन जाता है।

गलगोटिया यूनिवर्सिटी और सत्ता का दोहरा मापदंड

भारत मंडपम में ही इसी एआई समिट के दौरान गलगोटिया यूनिवर्सिटी के एक स्टाल पर जो हुआ, उस पर सरकार की चुप्पी शर्मनाक है। यूनिवर्सिटी ने एक विदेशी निर्मित 'रोबो-डॉग' को 'स्वदेशी तकनीक' बताकर प्रदर्शित किया। जब सच्चाई सामने आई, तो इसे केवल एक 'भूल' बताकर टाल दिया गया। क्या यह अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की साख के साथ खिलवाड़ नहीं था? क्या विदेशी डेलीगेट्स के सामने 'झूठा स्वदेशीवाद' परोसना देश की छवि को धूमिल करना नहीं है? किसी भी भाजपा मंत्री या नेता ने इस पर कोई सख्त टिप्पणी नहीं की।

इससे भी खतरनाक बात वह है जो पिछले कुछ दिनों में राहुल गांधी के संदर्भ में देखी गई। समिट के दौरान ही एक युवक ने सार्वजनिक रूप से नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधीको 'गोली मारने' की धमकी दी और उनके खिलाफ हिंसक बयानबाजी की। भाजपा की पूरी मशीनरी, जो एक 'शर्टलेस' विरोध पर 'राष्ट्रद्रोह' का विलाप कर रही है, उन हिंसक धमकियों पर रहस्यमयी चुप्पी साधे बैठी है। क्या किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को जान से मारने की धमकी देना 'भारत की गरिमा' के अनुकूल है?

डरी हुई सत्ता और भाजपा के प्रदर्शन

हैरानी की बात यह है कि केंद्र और कई राज्यों में सत्ता में होने के बावजूद, भाजपा ने दिल्ली समेत कई राज्यों में युवा कांग्रेस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए। यह अपने आप में एक विरोधाभास है। एक तरफ आप दुनिया को बता रहे हैं कि भारत 'विश्वगुरु' बन चुका है और सब कुछ नियंत्रित है, और दूसरी तरफ आप मुट्ठी भर प्रदर्शनकारियों से इतना डर जाते हैं कि आपको अपनी पूरी मशीनरी सड़कों पर उतारनी पड़ती है।

भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कांग्रेस को 'टॉपलेस, ब्रेनलेस और शेमलेस' कहा। लेकिन हकीकत यह है कि यह गुस्सा उन युवाओं का है जो देख रहे हैं कि एआई समिट के नाम पर डेटा संप्रभुता और देश के व्यापारिक हितों को अमेरिका के साथ समझौतों में दांव पर लगाया जा रहा है। 'पॉक्स सिलिका' (Pax Silica) जैसे समझौतों पर पारदर्शिता की कमी और 'एप्स्टीन फाइल्स' जैसे गंभीर मुद्दों पर प्रधानमंत्री की चुप्पी ही इस विरोध का असली कारण है।

लोकतंत्र में कपड़े उतारकर विरोध करना एक प्रतीकात्मक कृत्य है, जो यह दर्शाता है कि आम आदमी के पास खोने के लिए अब कुछ नहीं बचा है। प्रधानमंत्री मोदी को मेरठ के मंच से कांग्रेस के 'नंगेपन' पर कटाक्ष करने के बजाय यह बताना चाहिए था कि मेरठ की जनता को रैपिड रेल तो मिल गई, लेकिन उनके बच्चों को रोजगार कब मिलेगा?

भाजपा को यह समझना होगा कि भारत की छवि उसके 'चमकते हुए आयोजनों' से नहीं, बल्कि उसकी लोकतांत्रिक संस्थाओं और विरोध के अधिकार के संरक्षण से बनती है। अगर सरकार केवल प्रशंसा चाहती है और आलोचना से डरती है, तो उसे खुद को लोकतांत्रिक कहना बंद कर देना चाहिए। जिस 'नग्न राजनीति' की बात प्रधानमंत्री कर रहे हैं, उसका सबसे बड़ा उदाहरण वह अहंकार है जो सत्ता को विपक्ष के हर जायज विरोध में षडयंत्र नजर आने लगता है।

आज का युवा शर्ट उतारकर यह नहीं दिखा रहा कि वह निर्वस्त्र है, बल्कि वह यह दिखा रहा है कि सत्ता ने उसे कितना 'कंगाल' बना दिया है।

- Abhijit

23/02/2026

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