Saturday, February 7, 2026

गटर-ए-आज़म: पाकिस्तान का नया राष्ट्रीय संकट और 'ढक्कन' संरक्षण अधिनियम

कहते हैं कि जब किसी देश की किस्मत फूटी होती है, तो उसे ऊपरवाला नहीं, बल्कि वहां की सरकार और जनता मिलकर और ज्यादा फोड़ती है। हमारे पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के साथ आजकल कुछ ऐसा ही हो रहा है। वहाँ एक नया 'इंकलाब' आया है, और यह इंकलाब किसी बैलेट बॉक्स से नहीं, बल्कि सड़क के बीचों-बीच बने उस छेद से निकला है जिसे हम 'मैनहोल' या गटर कहते हैं।

जी हाँ, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में आजकल 'ढक्कन' राष्ट्रवाद अपने चरम पर है। स्थिति यह है कि परमाणु बम की धमकी देने वाले देश की मुख्यमंत्री अब टीवी पर आकर हाथ के इशारों से चोरों को चेतावनी दे रही हैं— "खुदारा, गटर के ढक्कन मत चुराओ!"

आटा, डेटा और अब गटर...

पाकिस्तान में संकटों की एक लंबी और गौरवमयी परंपरा रही है। पहले वहां आटे की कमी हुई, लोगों ने ट्रकों के पीछे मैराथन दौड़ लगाई। फिर महंगाई ऐसी बढ़ी कि पेट्रोल की कीमत सुनने के बाद इंसान को पेट्रोल की जरूरत ही नहीं पड़ती, वह खुद ही उड़ने लगता है। लेकिन अब जो नया संकट खड़ा हुआ है, वह पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के 'पाताल' में जाने का प्रमाण है। पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री मरियम नवाज शरीफ साहिबा के रातों की नींद हराम हो गई है, और इसकी वजह कोई विपक्षी नेता नहीं, बल्कि लोहे के वे गोल ढक्कन हैं जो गटर के ऊपर रखे जाते हैं।

मरियम साहिबा का एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें वह बड़े अफसोस के साथ कह रही हैं, "हम सुबह ढक्कन लगाते हैं, और रात को गायब हो जाते हैं।" सोचिए, जिस सरकार को कश्मीर की चिंता करनी चाहिए, वह सुबह-शाम गटर के ढक्कनों की गिनती कर रही है। यह पाकिस्तान का नया 'डिफेंस बजट' हैगटर के ढक्कन बचाओ आंदोलन!

'गटर कानून' - एक ऐतिहासिक उपलब्धि

जब समस्या गंभीर हो, तो पाकिस्तानी सरकार का एक ही समाधान होता हैएक ऐसा कानून बना दो जिसे सुनकर मुजरिम कम और दुनिया ज्यादा हंसे। पंजाब सरकार ने 'गटर कानून' (The Manhole Cover Protection Act) लागू किया है। इसके प्रावधान इतने सख्त हैं कि शायद ओसामा बिन लादेन को पकड़ने के लिए भी इतने कड़े कानून नहीं सोचे गए होंगे।

अब अगर कोई पाकिस्तान के पंजाब में मैनहोल का ढक्कन चुराते, बेचते या खरीदते हुए पकड़ा गया, तो उसे एक साल से लेकर दस साल तक की जेल हो सकती है। और अगर उस खुले गटर में गिरकर किसी की जान चली गई (जो कि वहां एक राष्ट्रीय खेल बनता जा रहा है), तो अपराधी को 10 साल की सजा और 30 लाख से 50 लाख रुपये तक का जुर्माना भरना होगा।

अब सवाल यह है कि जिस आदमी के पास आटे के पैसे नहीं हैं, जो लोहे का ढक्कन चुराकर दो वक्त की रोटी का जुगाड़ कर रहा है, वह 50 लाख रुपये का जुर्माना कहाँ से भरेगा? शायद वह भी किश्तों में 'इंटरनेशनल गटर फंड' (IGF) से कर्ज लेगा।

ढक्कन चुराने की 'इकोनॉमी'

दुनिया में लोग सोना चुराते हैं, डेटा चुराते हैं, यहाँ तक कि चुनाव भी चुरा लेते हैं (जिसका आरोप खुद मरियम साहिबा की पार्टी पर लगता रहा है) लेकिन ढक्कन चोरी करना एक अलग ही स्तर की कंगाली का परिचायक है। रिपोर्ट बताती हैं कि एक लोहे के ढक्कन का वजन करीब 30 किलो होता है और कबाड़ के बाजार में इसे बेचकर कुछ हजार रुपये मिल जाते हैं। पाकिस्तान की जनता अब इसी 'सर्कुलर इकोनॉमी' पर चल रही हैसरकारी संपत्ति हटाओ, अपना चूल्हा जलाओ।

लाहौर के भत्ती गेट से लेकर कराची की सड़कों तक, हर जगह लोग 'मौत के कुएं' में गिरने को मजबूर हैं। हाल ही में लाहौर में एक मां और उसकी मासूम बच्ची खुले मैनहोल में गिरकर मर गए। यह दुखद है, लेकिन सरकार का जवाब क्या है? "हम GPS वाले ढक्कन लगाएंगे।"

वाह! जिस देश के पास बिजली देने के लिए पैसे नहीं हैं, जहां इंटरनेट की स्पीड कछुए की चाल से चलती है, वहां अब गटर के ढक्कन 'स्मार्ट' होंगे। कल्पना कीजिए, एक चोर ढक्कन उठाता है और मुख्यमंत्री कार्यालय में अलार्म बजता है— "टिन-टिन! सेक्टर 4 का ढक्कन खतरे में है!"

क्या यह 'ग़ज़वा--गटर' है?

पाकिस्तान अक्सर 'ग़ज़वा--हिंद' की बात करता है, लेकिन फिलहाल वह 'ग़ज़वा--गटर' से जूझ रहा है। मरियम नवाज का कहना है कि वे हर रात चेक करती हैं कि कहां ढक्कन गायब हैं। मुख्यमंत्री का यह नया जॉब डिस्क्रिप्शन देखकर शायद उनके पिताजी नवाज शरीफ भी लंदन में अपना माथा पीट रहे होंगे।

पाकिस्तान की कंगाली का इससे बड़ा विज्ञापन और क्या होगा कि वहां का 'लोहा' अब सुरक्षित नहीं है। वहां के रक्षा विशेषज्ञ शायद अब मिसाइलों की सुरक्षा छोड़कर गटर के ढक्कनों पर नई रिसर्च कर रहे होंगे कि कैसे ढक्कन को 'चोरी-प्रूफ' बनाया जाए। कुछ बुद्धिजीवी तो यहाँ तक सुझाव दे रहे हैं कि ढक्कनों को सीधे जमीन में वेल्ड (Weld) कर दिया जाए, लेकिन फिर सफाई कौन करेगा? पाकिस्तान में सफाई की उम्मीद करना वैसे भी थोड़ा ज्यादती है।

ढक्कन की कीमत, सरकार की इज्जत

अंत में, बात सिर्फ एक लोहे के टुकड़े की नहीं है। यह उस देश की मानसिकता और आर्थिक पतन की कहानी है जिसने अपनी प्राथमिकताएं गलत चुनीं। जब आप अपनी जनता को शिक्षा और रोजगार के बजाय नफरत और खोखले नारे देते हैं, तो जनता फिर गटर के ढक्कनों में अपना भविष्य खोजने लगती है।

मरियम नवाज जी, कानून बनाने से ढक्कन नहीं बचेंगे। ढक्कन तब बचेंगे जब लोगों के पेट में रोटी होगी। लेकिन जब तक ऐसा नहीं होता, पाकिस्तान का हर गटर एक नया 'डेथ ट्रैप' बना रहेगा और दुनिया हंसती रहेगी।

तो अगली बार जब आप लाहौर की सड़कों पर चलें, तो अपनी आंखों के साथ-साथ अपने पैरों का भी ख्याल रखें। क्या पता, जिस ढक्कन पर आप कदम रखने जा रहे हों, वह कल सुबह किसी कबाड़ी की दुकान पर आटा बनकर बिक रहा हो!

खुदा हाफिज, और हां... ढक्कन संभाल के!

- Abhijit

07/02/2026

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