Thursday, February 19, 2026

नरेंद्र मोदी स्टेडियम में 'खुली लूट': क्रिकेट के नाम पर जनता की जेब काटने का गंदा खेल

18 फरवरी की वह शाम, जब अहमदाबाद का नरेंद्र मोदी स्टेडियम भारत और नीदरलैंड के बीच टी20 वर्ल्ड कप के रोमांचक मुकाबले का गवाह बन रहा था, करोड़ों भारतीयों के लिए गर्व का क्षण था। भारत ने नीदरलैंड को हराकर लगातार चौथी बार टूर्नामेंट जीतकर इतिहास रच दिया। लेकिन इस ऐतिहासिक जीत की चमक के पीछे एक ऐसा काला सच छिपा है, जिसने खेल भावना और मानवीय संवेदनाओं को तार-तार कर दिया है। मैदान के अंदर खिलाड़ी पसीना बहा रहे थे, तो मैदान के बाहर आईसीसी (ICC) और गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन (GCA) के संरक्षण में व्यापारियों दर्शकों को लूटने का गंदा खेल खेल रहे थे।

पानी की बूंद-बूंद के लिए वसूली: ₹20 की बोतल ₹100 में

अहमदाबाद की चिलचिलाती गर्मी में जब हजारों लोग अपनी टीम का उत्साहवर्धन करने पहुँचे, तो उन्हें क्या मिला? ₹20 की पानी की बोतल, जिस पर एमआरपी स्पष्ट रूप से अंकित थी, उसे ₹100 में बेचा गया। यह केवल व्यापार नहीं, बल्कि 'खुली डकैती' है। जब प्यास से व्याकुल बच्चा या बुजुर्ग पानी मांगता है, तो उसे मजबूरन अपनी जेब ढीली करनी पड़ती है। क्या जय शाह और जीसीए के प्रशासकों को यह दिखाई नहीं देता? क्या Contracts देते समय कीमतों पर कोई लगाम नहीं लगाई जाती, या फिर यह सब 'ऊपर' तक पहुँचने वाले कमीशन का खेल है?

बासी खाना और दोगुनी कीमतें: क्या यही है 'अतिथि देवो भव'?

लूट केवल पानी तक सीमित नहीं थी। पॉपकॉर्न, जिसकी लागत मुश्किल से ₹20-30 होती है, उसे ₹200 में बेचा गया। 300 मिलीलीटर की कोल्ड ड्रिंक के लिए ₹50 से ₹100 वसूले गए। सबसे शर्मनाक बात यह रही कि इतनी ऊँची कीमत चुकाने के बाद भी लोगों को जो खाना परोसा गया, वह ताजा नहीं था। बासी और गुणवत्ताहीन भोजन खिलाकर केवल लोगों की जेब काटी गई, बल्कि उनके स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ किया गया।

संवेदनहीनता की हद: बुजुर्गों और बच्चों से छीनी गईं दवाइयाँ

प्रशासन की संवेदनहीनता का आलम यह था कि सुरक्षा के नाम पर पुलिस ने बुजुर्गों और बच्चों को उनकी आवश्यक दवाइयाँ तक अंदर ले जाने की अनुमति नहीं दी। क्या अहमदाबाद की पुलिस और स्टेडियम प्रशासन यह भूल गया कि एक मधुमेह (Diabetic) रोगी या दिल की बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के लिए दवा कितनी अनिवार्य है? क्या क्रिकेट का आनंद लेने की कीमत अपनी जान जोखिम में डालकर चुकानी होगी? छोटे बच्चों के लिए दूध या जरूरी सामान ले जाने पर पाबंदी लगाना किसी तानाशाही से कम नहीं है।

सत्ता का अहंकार और प्रशासकों की मिलीभगत

आईसीसी के अध्यक्ष जय शाह, जो गृह मंत्री अमित शाह के सुपुत्र हैं, उनके नेतृत्व में क्रिकेट एक खेल कम और 'कॉर्पोरेट लूट' का अड्डा ज्यादा बन गया है। क्या जय शाह केवल फोटो खिंचवाने और ट्रॉफियां बांटने के लिए हैं? आखिर क्यों उनके नाक के नीचे आम जनता को इस तरह प्रताड़ित किया गया?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जिनके नाम पर इस भव्य स्टेडियम का निर्माण हुआ, अक्सर 'भ्रष्टाचार मुक्त भारत' की बात करते हैं। लेकिन क्या उनके अपने राज्य गुजरात में, उनकी अपनी पार्टी (BJP) की सरकार के तहत होने वाली इस 'खुली लूट' पर उनकी नजर नहीं पड़ती? अमित शाह जी, जो देश की आंतरिक सुरक्षा के प्रभारी हैं, क्या वे अपने गृह जनपद में हो रही इस प्रशासनिक अराजकता और गुंडागर्दी को नहीं देख पा रहे?

सरकार और नगर निगम की रहस्यमयी चुप्पी

अहमदाबाद नगर निगम (AMC) का खाद्य विभाग और गुजरात सरकार का आपूर्ति विभाग आखिर सो कहाँ रहा है? जब शहर की छोटी दुकानों पर छापेमारी कर जुर्माने वसूले जाते हैं, तो इस भव्य स्टेडियम के अंदर चल रही कालाबाजारी पर ताले क्यों लग जाते हैं? क्या इन व्यापारियों को भाजपा सरकार का राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है? क्या सरकार को डर है कि अगर इन स्टालों पर कार्रवाई की गई, तो क्रिकेट के नाम पर होने वाली कमाई में कमी आएगी?

पैसा ही एकमात्र उद्देश्य?

आज के दौर में बीसीसीआई (BCCI) और आईसीसी दुनिया की सबसे अमीर संस्थाएं बन चुकी हैं। लेकिन ऐसा लगता है कि इनके प्रशासकों की भूख अभी भी नहीं मिटी है। प्रशंसकों को केवल एक 'कैश काउ' समझा जा रहा है, जिनसे जितना हो सके उतना पैसा निचोड़ लिया जाए। स्टेडियम में बुनियादी सुविधाएं देने के बजाय उन्हें मजबूर कर लूटना यह दर्शाता है कि अब खेल केवल अमीरों और पूंजीपतियों की जागीर बनकर रह गया है।

अगर गुजरात सरकार और केंद्र की मोदी सरकार वास्तव में जनता की परवाह करती है, तो उन्हें तुरंत इस मामले की उच्च स्तरीय जांच करानी चाहिए। उन अधिकारियों पर गाज गिरनी चाहिए जिन्होंने दवा जैसी बुनियादी जरूरतों को रोकने का पाप किया है। क्रिकेट प्रेमियों का धैर्य अब जवाब दे रहा है - याद रखिए, खेल प्रशंसकों से है, प्रशंसकों की मजबूरी से खेल नहीं।

- Abhijit

19/02/2026

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