Monday, February 2, 2026

बजट 2026-27: 'विकसित भारत' की ऊंची उड़ान, पर मध्यम वर्ग के पंख कतरे?

केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत बजट 2026-27 से मध्यम वर्ग को बड़ी उम्मीदें थींमहंगाई से राहत, आयकर में कटौती, शिक्षा-स्वास्थ्य पर अधिक खर्च और रोजगार सृजन की ठोस योजना। लेकिन यह बजट एक बार फिर साबित करता है कि सरकार की प्राथमिकताएं आम नागरिक नहीं, बल्कि कॉर्पोरेट हित और राजनीतिक प्रचार हैं।

मध्यम वर्ग के लिए कर राहत का अभाव

इस बजट में आयकर स्लैब में कोई ठोस और व्यापक सुधार नहीं किया गया। बढ़ती महंगाई, शिक्षा खर्च, स्वास्थ्य बीमा, ईएमआई और रोजमर्रा की लागत के बीच मध्यम वर्ग पहले ही दबाव में है। इसके बावजूद सरकार ने करदाताओं को वास्तविक राहत देने से परहेज किया। यह स्पष्ट संकेत है कि मेहनतकश करदाता सरकार के लिए केवल राजस्व का स्रोत बनकर रह गया है।

महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती लागत पर चुप्पी

खाद्य पदार्थों, रसोई गैस, ईंधन और दवाइयों की बढ़ती कीमतों पर बजट में कोई ठोस समाधान नहीं दिखता। पेट्रोल-डीजल पर कर कम करने के बजाय सरकार ने अप्रत्यक्ष करों पर निर्भरता बनाए रखी, जिससे आम जनता पर बोझ और बढ़ेगा।

रोजगार सृजन: वादों का पुलिंदा, कार्यवाही शून्य

युवाओं के लिए रोजगार सृजन की घोषणाएं हर बजट में होती हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर बेरोजगारी की स्थिति लगातार गंभीर हो रही है। इस बजट में भी रोजगार के लिए कोई ठोस, क्रियान्वयन योग्य और दीर्घकालिक योजना नहीं दिखतीसिर्फ़ पुराने वादों की पुनरावृत्ति है।

शिक्षा और स्वास्थ्य: प्राथमिकता नहीं, औपचारिकता मात्र

देश का भविष्य शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ा है, लेकिन इन दोनों क्षेत्रों के लिए आवंटन अपेक्षाकृत कमजोर रहा। निजीकरण को बढ़ावा देने की नीति जारी है, जिससे आम नागरिक के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं और महंगी हो रही हैं।

कॉर्पोरेट सेक्टर को राहत, आम जनता को निराशा

जहां एक ओर बड़े उद्योगपतियों और कॉर्पोरेट सेक्टर को कर रियायतें, प्रोत्साहन और निवेश योजनाएं दी गई हैं, वहीं मध्यम और निम्न वर्ग के लिए कोई समानुपातिक राहत नहीं दिखाई देती। यह बजट आर्थिक असमानता को कम करने के बजाय और गहरा करने की आशंका पैदा करता है।

कल्याणकारी योजनाएं: प्रचार अधिक, प्रभाव कम

सरकार ने कई योजनाओं का उल्लेख किया, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने में विफल रहता है। बजट में जवाबदेही, पारदर्शिता और वास्तविक सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दी गई।

यह बजट किसके लिए है?

केंद्रीय बजट 2026-27 मध्यम वर्ग के लिए आशा नहीं, निराशा का दस्तावेज़ बनकर सामने आया है। यह बजट जनहित से अधिक कॉरपोरेट हित और राजनीतिक छवि निर्माण का प्रतीक प्रतीत होता है। यदि सरकार वास्तव मेंविकसित भारतका सपना देखती है, तो उसे सबसे पहले उस मध्यम वर्ग को सशक्त करना होगा, जो देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैना कि उसे लगातार उपेक्षित करना।

- Abhijit

02/02/2026