महाराष्ट्र की राजनीति के 'दिग्गज' और 'दादा' कहे जाने वाले अजित पवार का एक विमान दुर्घटना में असमय निधन राज्य के लिए एक अपूरणीय क्षति है। लेकिन सत्ता के गलियारों में शोक की लहर के बीच अब उत्तराधिकार की दौड़ शुरू हो चुकी है। बारामती से लेकर मुंबई तक एक ही सवाल गूँज रहा है—अजित पवार की विरासत अब किसके पास जाएगी?
प्रफुल्ल पटेल और भुजबल की फडणवीस से मुलाकात: गठबंधन का भविष्य
शुक्रवार को एनसीपी (अजित गुट) के वरिष्ठ नेताओं—प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल और सुनील तटकरे—ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से उनके आवास 'वर्षा' पर मुलाकात की। आधिकारिक तौर पर यह बैठक सांत्वना और शोक व्यक्त करने के लिए थी, लेकिन सत्ता के गलियारों में चर्चा इस बात की है कि एनसीपी के कोटे से खाली हुए उपमुख्यमंत्री पद और वित्त मंत्रालय की चाबी किसके पास जाएगी। महायुति सरकार के लिए यह दौर काफी नाजुक है, क्योंकि बजट सत्र नजदीक है और अजित पवार के पास वित्त जैसा महत्वपूर्ण विभाग था।
सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम बनाने की मांग: भावना या राजनीति?
एनसीपी के भीतर अब एक बड़ा धड़ा अजित पवार की पत्नी और राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाने की मांग कर रहा है। कैबिनेट मंत्री नरहरि जिरवाल ने सार्वजनिक रूप से 'वहिनी' (भाभी) के नाम का समर्थन किया है। इसके पीछे दो मुख्य तर्क दिए जा रहे हैं:
- एकजुटता: अजित पवार के साथ आए विधायकों को डर है कि उनके बिना गुट बिखर सकता है। पवार परिवार का ही कोई सदस्य इस 'फ्लोक' को एकजुट रख सकता है।
- सहानुभूति लहर: बारामती और पुणे क्षेत्र में अजित दादा के प्रति गहरा सम्मान था। सुनेत्रा पवार को आगे कर पार्टी आने वाले उपचुनावों और विधानसभा चुनावों में सहानुभूति का लाभ उठाना चाहती है।
शरद पवार की भूमिका: क्या होगा 'महा-विलय'?
सबसे बड़ा सवाल अब शरद पवार के रुख पर है। राजनीति के इस 'भीष्म पितामह' ने फिलहाल चुप्पी साध रखी है, लेकिन उनके करीबियों का कहना है कि वे ही तय करेंगे कि एनसीपी का भविष्य क्या होगा। अजित पवार की मृत्यु के बाद दोनों गुटों के बीच की कड़वाहट कम होती दिख रही है। सुप्रिया सुले और जयंत पाटिल का सुनेत्रा पवार से मिलना इस बात का संकेत है कि 'पुनर्मिलन' की संभावनाओं पर पर्दे के पीछे बात चल रही है।
क्या शरद पवार अपनी बहू को उपमुख्यमंत्री बनते देखना चाहेंगे या वे पार्टी के दोनों धड़ों को एक साथ लाकर नेतृत्व सुप्रिया सुले को सौंपेंगे? यह फैसला न केवल पवार परिवार, बल्कि महाराष्ट्र की 2026 की राजनीति की दिशा तय करेगा।
चुनौती और अवसर
सुनेत्रा पवार के लिए राजनीति नई नहीं है, लेकिन उपमुख्यमंत्री जैसा पद संभालना और अजित पवार जैसी प्रशासनिक पकड़ बनाना एक बड़ी चुनौती होगी। उधर, देवेंद्र फडणवीस और भाजपा के लिए यह संतुलन बनाने का समय है कि वे एनसीपी के आंतरिक मामलों में कितना हस्तक्षेप करते हैं।
अजित पवार के जाने से महाराष्ट्र ने एक 'काम करने वाला' नेता खोया है, लेकिन उनकी कुर्सी के लिए शुरू हुई यह 'analytical' जंग बताती है कि राजनीति में शोक की जगह भी सत्ता की गोटियों ने ले ली है।
- Abhijit
Nice article
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