भारत त्योहारों का देश है, और यहाँ हर ऋतु का अपना एक विशेष उत्सव होता है। लेकिन जब बात जनवरी की ठिठुरती ठंड में गुनगुनी धूप और खुले आसमान की आती है, तो मन में बस एक ही नाम गूँजता है - मकर संक्रांति। विशेष रूप से गुजरात में, इस त्यौहार को 'उत्तरायण' के रूप में एक अलग ही जुनून और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।
मकर संक्रांति का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व
मकर संक्रांति केवल तिल-गुड़ खाने का दिन नहीं है, बल्कि यह खगोलीय परिवर्तन का प्रतीक है। इस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है। वैज्ञानिक दृष्टि से, इसी दिन से सूर्य उत्तर की ओर गमन करना शुरू करता है, जिसे 'उत्तरायण' कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार, उत्तरायण का समय देवताओं का दिन माना जाता है और यह अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का संदेश देता है।
गुजरात का गौरव: उत्तरायण और पतंगबाजी
गुजरात में उत्तरायण सिर्फ एक त्यौहार नहीं, बल्कि एक भावना है। यहाँ महीनों पहले से ही 'पतंग बाजार' सजने लगते हैं। साबरमती के तट से लेकर सूरत की गलियों तक, हर जगह बस रंग-बिरंगी पतंगें और फिरकियों का ही नज़ारा होता है।
1. छतों पर उत्सव: उत्तरायण के दिन गुजरात की सड़कें सूनी हो जाती हैं और पूरा शहर छतों पर आ बसता है। सुबह की पहली किरण के साथ ही छतों पर म्यूजिक सिस्टम लग जाते हैं और "काय पो छे!" (काट दिया है) और "ए लपेट!" के शोर से आसमान गूँज उठता है।
2. खान-पान का विशेष आनंद: गुजरात में उत्तरायण की बात 'उंधियू' और 'जलेबी' के बिना अधूरी है। मौसमी सब्जियों से बना 'उंधियू', 'चीकी' (तिल और मूंगफली की पट्टी) और 'खींचू' इस दिन के मुख्य पकवान होते हैं। परिवार के सभी सदस्य साथ मिलकर इन व्यंजनों का आनंद लेते हैं।
3. अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव: अहमदाबाद में आयोजित होने वाला 'इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल' दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करता है। यहाँ विदेशों से आए पतंगबाज अपनी अनोखी पतंगों का प्रदर्शन करते हैं, जो गुजरात की संस्कृति को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करता है।
सामाजिक सौहार्द और दान का पर्व
मकर संक्रांति का एक महत्वपूर्ण पहलू 'दान' है। इस दिन गायों को घास खिलाना, गरीबों को अनाज, कंबल और तिल का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह त्यौहार हमें सिखाता है कि जिस तरह पतंग को ऊँचा उड़ने के लिए ढील और खिंचाव दोनों के संतुलन की आवश्यकता होती है, वैसे ही जीवन में भी संतुलन और दूसरों की मदद करना जरूरी है।
सावधानी और जिम्मेदारी
जहाँ हम इस पर्व का आनंद लेते हैं, वहीं हमें अपने पक्षियों का भी ध्यान रखना चाहिए। मांझे (धागे) से घायल होने वाले पक्षियों को बचाने के लिए कई संस्थाएं काम करती हैं। हमें चाहिए कि हम सुरक्षित मांझे का उपयोग करें और पक्षियों के लिए संवेदनशील रहें।
मकर संक्रांति या उत्तरायण खुशियों का त्योहार है। यह दिलों के बीच की दूरियों को कम करने और उम्मीदों की नई उड़ान भरने का दिन है। आइए, इस साल हम भी अपनी पुरानी कड़वाहटों को "काट" दें और प्यार की डोर से रिश्तों को और मजबूत करें।
आप सभी को मकर संक्रांति और उत्तरायण की हार्दिक शुभकामनाएँ!
- Abhijit
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