प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी 'नल से जल' (जल जीवन मिशन) योजना आज करोड़ों भारतीयों के लिए जीवनदायिनी बनने के बजाय जानलेवा साबित हो रही है। केंद्र सरकार और भाजपा शासित राज्यों—मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और गुजरात—की सरकारें विज्ञापनों पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही हैं, लेकिन हकीकत यह है कि जनता के नलों से शुद्ध जल नहीं, बल्कि 'ज़हर' बह रहा है।
इंदौर और गांधीनगर: 'मॉडल सिटी' में पसरा मौत का मातम
स्वच्छता में नंबर वन रहने का दावा करने वाले इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में हाल ही में दूषित पानी पीने से जो भयावह मंजर दिखा,
उसने सरकारी दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। वहां दूषित पानी के कारण 18 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग अस्पतालों में जीवन-मौत की जंग लड़ रहे हैं।
यही हाल प्रधानमंत्री के गृह राज्य गुजरात की राजधानी गांधीनगर का है। जिस राज्य को विकास का 'मॉडल'
बताया जाता है, वहां की राजधानी में 150 से अधिक बच्चे और बुजुर्ग टाइफाइड और गंभीर संक्रमण के शिकार होकर अस्पतालों में भर्ती हैं। पाइपलाइनों में सीवेज का पानी मिल जाना इस बात का प्रमाण है कि करोड़ों की योजनाएं केवल कागजों और ठेकेदारों की जेब भरने तक सीमित हैं।
नोएडा और गाज़ियाबाद: हाई-टेक शहरों में 'पीला और बदबूदार' पानी
उत्तर प्रदेश के नोएडा और गाज़ियाबाद जैसे हाई-टेक शहरों में भी स्थिति चिंताजनक है। ग्रेटर नोएडा के कई सेक्टरों में लोग महीनों से पीला और बदबूदार पानी पीने को मजबूर हैं। प्रशासन की लापरवाही और पुरानी, जर्जर पाइपलाइनों के कारण सीवेज का पानी पेयजल आपूर्ति में मिल रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 'जीरो टॉलरेंस' नीति यहां भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती दिख रही है, जहां जनता की शिकायतों को दरकिनार कर केवल 'सफलता' के पोस्टर चिपकाए जा रहे हैं।
करोड़ों के विज्ञापन बनाम नागरिकों की जान
मोदी सरकार और मध्य प्रदेश में मोहन यादव,
गुजरात में भूपेंद्र पटेल व उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकारें इस योजना की 'सफलता' का ढोल पीटने के लिए जनता की गाढ़ी कमाई के लाखों-करोड़ों रुपये विज्ञापनों पर खर्च कर रही हैं।
- सवाल यह है: क्या इन चमकते पोस्टरों से नागरिकों की प्यास बुझेगी?
- सवाल यह है: जब नल से पीला और दूषित पानी आ रहा है, तो सरकार किस 'हर घर जल' का जश्न मना रही है?
सरकारी संवेदनहीनता और भ्रष्टाचार का खेल
यह केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि एक आपराधिक लापरवाही है। पाइपलाइन बिछाने के नाम पर जो भ्रष्टाचार हुआ है, उसी का नतीजा है कि आज पाइपों में लीकेज है और शुद्ध पानी में मल-मूत्र का मिश्रण हो रहा है। केंद्र सरकार अपनी पीठ थपथपाने में व्यस्त है, जबकि मध्यम और गरीब वर्ग के लोग दूषित पानी पीकर मौत के मुंह में धकेले जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी जी, विज्ञापन की दुनिया से बाहर निकलकर इंदौर के उन परिवारों का दर्द देखिए जिन्होंने अपनों को खोया है। गांधीनगर के उन बच्चों की चीखें सुनिए जो अस्पताल के बेड पर पड़े हैं। 'नल से जल' योजना आज अपनी विश्वसनीयता खो चुकी है। यदि सरकारें समय रहते नहीं जागीं और सिर्फ आंकड़ों के खेल में उलझी रहीं, तो यह योजना इतिहास में 'हर घर नल' नहीं, बल्कि 'हर घर ज़हर' के रूप में याद की जाएगी।
जनता अब विज्ञापनों से नहीं, शुद्ध पेयजल से अपनी प्यास बुझाना चाहती है!
- Abhijit
Veryy well written!! Keep it up
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