टी20 विश्व कप के दूसरे सेमीफाइनल में भारत ने इंग्लैंड को रोमांचक मुकाबले में 7 रन से हराकर चौथी बार फाइनल में जगह बना ली। यह जीत आसान नहीं थी, क्योंकि इंग्लैंड के युवा बल्लेबाज़ जैकब बेथेल ने जिस तरह की आक्रामक पारी खेली, उससे एक समय ऐसा लग रहा था कि भारत की फाइनल की उम्मीदें टूट जाएंगी। लेकिन अंतिम ओवरों में जसप्रीत बुमराह की सटीक गेंदबाज़ी और टीम की संयमित फील्डिंग ने मैच का रुख बदल दिया और भारत को एक ऐतिहासिक जीत दिलाई।
भारत अब रविवार 8 मार्च को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी
स्टेडियम में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ फाइनल खेलेगा। यह मुकाबला इसलिए भी खास है
क्योंकि भारत के पास अपने घरेलू मैदान पर विश्व कप जीतने का सुनहरा मौका होगा।
भारत की चौथी बार फाइनल में एंट्री
टी20 विश्व कप के इतिहास में यह चौथी बार है जब भारतीय टीम
फाइनल में पहुंची है। इससे पहले भारत 2007, 2014 और 2024 में फाइनल में पहुंच चुका है। 2007 में
भारत ने खिताब जीता था, जबकि 2014 में श्रीलंका के खिलाफ हार का
सामना करना पड़ा था। 2024 के फाइनल की यादें भी अभी ताज़ा हैं। ऐसे में इस बार
भारतीय टीम के पास इतिहास रचने का मौका है।
टीम इंडिया का इस टूर्नामेंट में प्रदर्शन काफी संतुलित रहा
है। बल्लेबाज़ी और गेंदबाज़ी दोनों में टीम ने अच्छे संकेत दिए हैं। हालांकि
सेमीफाइनल में गेंदबाज़ी की शुरुआत थोड़ी कमजोर दिखी, लेकिन अंत में
अनुभव ने युवा जोश पर जीत हासिल की।
बेथेल की तूफानी पारी ने बढ़ाई धड़कनें
इंग्लैंड के बल्लेबाज़ जैकब बेथेल ने भारतीय गेंदबाज़ों की
जमकर परीक्षा ली। उन्होंने सिर्फ 48 गेंदों में 105 रन की
विस्फोटक पारी खेली। उनकी बल्लेबाज़ी में आत्मविश्वास और आक्रामकता साफ दिखाई दे
रही थी। वह मैदान के चारों तरफ शॉट लगा रहे थे और भारतीय गेंदबाज़ों की लाइन-लेंथ
बिगाड़ रहे थे।
एक समय ऐसा लग रहा था कि भारत के हाथ से मैच निकल चुका है।
भारतीय गेंदबाज़ों में जसप्रीत बुमराह को छोड़कर किसी की गेंदबाज़ी में अनुशासन
नजर नहीं आ रहा था। कई गेंदें फुल टॉस और शॉर्ट पड़ रही थीं, जिनका बेथेल ने
पूरा फायदा उठाया।
उनकी बल्लेबाज़ी देखकर लग रहा था कि इंग्लैंड आसानी से
लक्ष्य हासिल कर लेगा। लेकिन क्रिकेट का खेल आखिरी गेंद तक अनिश्चितता से भरा होता
है।
बुमराह का 18वां ओवर बना मैच का टर्निंग पॉइंट
जब मैच इंग्लैंड की तरफ झुकता हुआ दिख रहा था, तभी जसप्रीत बुमराह ने 18वां ओवर फेंका। इस ओवर में उन्होंने सिर्फ 6 रन दिए। टी20 क्रिकेट में डेथ ओवरों में यह बेहद किफायती गेंदबाज़ी मानी जाती है।
बुमराह की यही खासियत है कि वह दबाव के क्षणों में भी अपनी
लाइन और लेंथ नहीं खोते। उनकी यॉर्कर और धीमी गेंदों ने इंग्लैंड के बल्लेबाज़ों
को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। यही ओवर मैच का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
इस ओवर के बाद भारत को जीत की उम्मीद फिर से दिखाई देने
लगी।
हार्दिक पंड्या की सूझबूझ
19वें ओवर में हार्दिक पंड्या ने इंग्लैंड के लिए एक और झटका दिया। उन्होंने सैम करन को आउट करवा दिया। करन का कैच तिलक वर्मा ने लपका। इस विकेट के गिरते ही इंग्लैंड की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा।
पंड्या की गेंदबाज़ी में रणनीति साफ नजर आई। उन्होंने
बल्लेबाज़ों को बड़े शॉट खेलने के लिए मजबूर किया और फील्डिंग का फायदा उठाया।
आखिरी ओवर का रोमांच
मैच का आखिरी ओवर शिवम दुबे के हाथों में था। इंग्लैंड को
जीत के लिए 6 गेंदों में 30 रन चाहिए थे। यह लक्ष्य मुश्किल
जरूर था, लेकिन टी20 क्रिकेट में असंभव नहीं कहा जा सकता।
पहली गेंद पर बेथेल ने दो रन लेकर स्ट्राइक अपने पास रखने
की कोशिश की। लेकिन तभी हार्दिक पंड्या ने तेजी से गेंद विकेटकीपर संजू सैमसन की
ओर फेंकी और सैमसन ने बेथेल को रन आउट कर दिया।
बेथेल के आउट होते ही इंग्लैंड की आखिरी उम्मीद भी खत्म हो
गई। इसके बाद भारत की जीत लगभग तय हो गई।
भारतीय टीम के लिए सीख
हालांकि भारत ने मैच जीत लिया, लेकिन गेंदबाज़ी के
प्रदर्शन पर सवाल जरूर उठते हैं। जसप्रीत बुमराह को छोड़कर बाकी गेंदबाज़ों की
लाइन और लेंथ कई बार बिगड़ती दिखी।
फाइनल जैसे बड़े मैच में ऐसी गलतियों की गुंजाइश कम होती
है। टीम को इस पर ध्यान देना होगा। खासकर डेथ ओवरों की गेंदबाज़ी को और बेहतर
बनाना होगा।
अहमदाबाद में ऐतिहासिक फाइनल
अब सभी की निगाहें 8 मार्च को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी
स्टेडियम पर होंगी, जहां भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच फाइनल मुकाबला खेला
जाएगा।
यह स्टेडियम दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम है और
यहां का माहौल हमेशा यादगार होता है। घरेलू दर्शकों के सामने खेलना भारतीय टीम के
लिए एक बड़ा मनोबल होगा।
न्यूज़ीलैंड की टीम भी बड़े मुकाबलों में शांत और संतुलित
प्रदर्शन के लिए जानी जाती है। इसलिए फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक होने की उम्मीद
है।
क्या भारत दोबारा बनेगा चैंपियन?
भारत के पास एक बार फिर टी20 विश्व कप जीतने का मौका है। टीम
में अनुभव और युवा ऊर्जा का अच्छा संतुलन है। रोहित शर्मा का नेतृत्व, बुमराह की
गेंदबाज़ी और मध्यक्रम की स्थिरता भारत की सबसे बड़ी ताकत है।
अगर भारतीय टीम फाइनल में अपनी रणनीति पर टिके रहते हुए
अनुशासित खेल दिखाती है, तो ट्रॉफी जीतने की संभावना काफी मजबूत है।
क्रिकेट प्रेमियों को अब रविवार का इंतजार है। अहमदाबाद का
नरेंद्र मोदी स्टेडियम एक बार फिर इतिहास का गवाह बनने जा रहा है। यह देखना
दिलचस्प होगा कि क्या भारत 2007 के बाद दूसरी बार टी20 विश्व
कप की ट्रॉफी अपने नाम कर पाता है या नहीं।
एक बात तय है—सेमीफाइनल की इस रोमांचक जीत ने भारतीय
क्रिकेट प्रेमियों की उम्मीदों को नई उड़ान दे दी है।
- Abhijit
Good
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