गुजरात की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। इस बार हमला किसी स्थानीय नेता ने नहीं, बल्कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने किया है। केरल की शांत वादियों में इडुक्की की एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए खड़गे जी ने जो विषवमन किया, उसने न केवल राजनीति की गरिमा को गिराया है, बल्कि साढ़े छह करोड़ गुजरातियों के स्वाभिमान को गहरी चोट पहुँचाई है।
खड़गे ने अपने भाषण में कहा— "मोदीजी, आप केरल के लोगों को बेवकूफ नहीं बना सकते, वे बहुत समझदार और शिक्षित हैं। आप गुजरात या अन्य जगहों के 'अनपढ़' (Illiterate) लोगों को मूर्ख बना सकते हैं, लेकिन केरल के लोगों को नहीं।"
यह बयान सुनते ही मन में पहला सवाल यही उठता है— खड़गे साहब, आखिर गुजरात से आपकी और आपकी पार्टी की यह कैसी नफरत है? क्या विकास की राह पर चलने वाला, औद्योगिक क्रांति का नेतृत्व करने वाला और देश को महात्मा गांधी व सरदार पटेल जैसे महापुरुष देने वाला गुजरात आपको 'अनपढ़' दिखाई देता है?
अपमान की पुरानी परंपरा
सच तो यह है कि कांग्रेस के लिए गुजरात को गाली देना कोई नई बात नहीं है। 'मौत का सौदागर' से लेकर 'नीच' और 'औकात' दिखाने तक के बयानों की एक लंबी फेहरिस्त है। लेकिन खड़गे ने इस बार सारी सीमाएं लांघ दीं। उन्होंने सीधे तौर पर गुजरात की जनता की बौद्धिक क्षमता पर सवाल खड़ा कर दिया। क्या खड़गे भूल गए कि जिस गुजरात को वो अनपढ़ कह रहे हैं, उसी गुजरात ने भारत को दुनिया की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में सबसे बड़ा योगदान दिया है? क्या अमूल की सहकारी क्रांति, वाइब्रेंट गुजरात का मॉडल और यहाँ की उद्यमी सोच किसी अनपढ़ समाज की उपज हो सकती है?
मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री का करारा जवाब
इस अपमानजनक टिप्पणी पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने बेहद कड़ा और तर्कपूर्ण विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह टिप्पणी न केवल 6.5 करोड़ गुजरातियों का अपमान है, बल्कि गांधी और सरदार की पावन धरा की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाली है। मुख्यमंत्री ने सही कहा कि कांग्रेस असल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को मिल रहे अपार जनसमर्थन से बौखला गई है। जब तर्क खत्म हो जाते हैं, तो कुंठा गाली बनकर बाहर निकलती है।
वहीं, उप-मुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने भी खड़गे को आईना दिखाते हुए कहा कि राजनीति में वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन पूरे राज्य के नागरिकों को अशिक्षित कहना कांग्रेस की बीमार मानसिकता का परिचायक है।
गुजरात कांग्रेस के 'मौन' नेताओं से सीधा सवाल
लेकिन सबसे बड़ा सवाल उन चेहरों पर है जो खुद को गुजरात का बेटा कहते हैं और कांग्रेस की राजनीति करते हैं। अमित चावड़ा, शक्तिसिंह गोहिल, भरतसिंह सोलंकी, जिग्नेश मेवाणी, शैलेश परमार और तुषार चौधरी— इन सबकी जुबान पर ताला क्यों लगा है?
जब आपके राष्ट्रीय अध्यक्ष सरेआम आपके ही प्रदेश के लोगों को 'अनपढ़' और 'मूर्ख' कह रहे हैं, तब आप चुप क्यों हैं? क्या आपकी निष्ठा आपके प्रदेश की जनता के प्रति है या उस आलाकमान के प्रति जो गुजरातियों से नफरत करता है? आपकी यह चुप्पी यह साबित करती है कि आप भी इसी मानसिकता का हिस्सा हैं। अगर आप खड़गे के बयान का सार्वजनिक विरोध नहीं करते, तो गुजरात की जनता यह मान लेगी कि आप भी उन्हें 'अनपढ़' ही समझते हैं।
शक्तिसिंह जी, आप तो खुद को तार्किक नेता मानते हैं, क्या आपको खड़गे के इस बयान में कोई तर्क नजर आता है? जिग्नेश मेवाणी, जो अक्सर 'संविधान' और 'अधिकार' की बात करते हैं, क्या गुजरातियों को अपमानित करना किसी के अधिकार क्षेत्र में आता है?
क्या शिक्षा का मतलब सिर्फ डिग्री है?
केरल की साक्षरता दर अधिक हो सकती है, और हम उसका सम्मान करते हैं। लेकिन साक्षरता का मतलब दूसरों को नीचा दिखाना नहीं होता। गुजरात की धरती 'व्यावहारिक शिक्षा' की जननी है। यहाँ का एक छोटा व्यापारी भी अर्थशास्त्र की ऐसी समझ रखता है जो बड़े-बड़े डिग्रीधारियों के पास नहीं होती। खड़गे साहब,
जिस गुजरात ने देश को गृह मंत्री और प्रधानमंत्री दिया, जिसने देश की सीमाओं को सुरक्षित किया और जिसने आपदाओं के बाद भी फिर से खड़े होने का साहस दिखाया, उस जनता को मूर्ख कहना आपकी राजनीतिक विदाई का संकेत है।
गुजरात की जनता देगी करारा जवाब
आने वाले चुनावों में गुजरात की जागरूक जनता इस अपमान का बदला जरूर लेगी। कांग्रेस को यह समझना होगा कि जनता को 'अनपढ़' कहकर आप उनका वोट नहीं पा सकते। लोकतंत्र में जनता जनार्दन होती है, और जो नेता या पार्टी जनता को ही मूर्ख समझने की गलती करती है, इतिहास उसे कूड़ेदान में फेंक देता है।
अमित चावड़ा और शक्तिसिंह गोहिल जैसे नेताओं को तय करना होगा - वे गुजरात के साथ खड़े हैं या गुजरात विरोधियों के साथ? आपकी चुप्पी आपको इतिहास के कटघरे में खड़ा करेगी। याद रखिएगा, गुजरात भूलता नहीं है, गुजरात जवाब देना जानता है!
जय जय गरवी गुजरात!
- Abhijit
No comments:
Post a Comment