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Monday, April 6, 2026

राष्ट्रवाद का चोगा और विदेशी पासपोर्ट की हकीकत: भाजपा का दोहरा चेहरा

भारत की राजनीति में इन दिनों 'राष्ट्रवाद' की परिभाषा केवल भाजपा के मुख्यालय से तय होती है। यदि आप भाजपा के साथ हैं, तो आपकी राष्ट्रभक्ति पर कोई संदेह नहीं कर सकता, लेकिन यदि आप विपक्ष में हैं, तो आपकी निष्ठा हर दिन सवालों के घेरे में रहती है। हाल ही में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा को लेकर जो खुलासे हुए हैं, उन्होंने भाजपा के इस 'सुविधाजनक राष्ट्रवाद' की कलई खोल कर रख दी है।

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने रविवार को दिल्ली में एक सनसनीखेज प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने जो दस्तावेज सार्वजनिक किए, वे केवल चौंकाने वाले हैं, बल्कि देश की सुरक्षा और नैतिकता पर बड़े सवाल खड़े करते हैं। खेड़ा का आरोप है कि असम के मुख्यमंत्री की पत्नी के पास एक नहीं, बल्कि तीन देशोंमिस्र (Egypt), एंटीगुआ-बारबुडा और संयुक्त अरब अमीरात (UAE)—के पासपोर्ट हैं। भारत का कानून दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं देता, ऐसे में एक मुख्यमंत्री की पत्नी का तीन विदेशी पासपोर्ट रखना केवल अवैध है, बल्कि यह एक गंभीर संवैधानिक संकट भी है।

नफरत की राजनीति और 'इस्लामिक' देशों के पासपोर्ट

सबसे बड़ा विरोधाभास यहाँ मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की राजनीति में दिखता है। हिमंत बिस्वा सरमा अपनी राजनीति की रोटी मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाकर सेंकते हैं। वे अक्सर असम में 'मियां' मुसलमानों और घुसपैठियों के खिलाफ आग उगलते रहते हैं। लेकिन पवन खेड़ा के खुलासे बताते हैं कि उन्हीं की पत्नी के पास दो मुस्लिम बहुल देशों (मिस्र और यूएई) के पासपोर्ट हैं। क्या यह पाखंड की पराकाष्ठा नहीं है? एक तरफ आप आम जनता को धर्म के नाम पर लड़ाते हैं, और दूसरी तरफ आपका परिवार उन्हीं देशों की नागरिकता और 'गोल्डन कार्ड' लेकर बैठा है जिन्हें आप अपनी राजनीति में दुश्मन की तरह पेश करते हैं।

52 हजार करोड़ का साम्राज्य: आखिर पैसा कहाँ से आया?

आरोप केवल नागरिकता तक सीमित नहीं हैं। पवन खेड़ा ने दावा किया कि हिमंत की पत्नी की अमेरिका में एक कंपनी है जिसकी कीमत 52 हजार करोड़ रुपये है। यह आंकड़ा सुनकर किसी भी आम भारतीय का सिर चकरा सकता है। एक जनसेवक, जो खुद को राज्य का रक्षक बताता है, उसके परिवार के पास इतनी बेहिसाब संपत्ति विदेश में कैसे जमा हो गई? क्या प्रवर्तन निदेशालय और केंद्रीय जांच ब्यूरो की नज़रें केवल विपक्षी नेताओं के दरवाजों तक ही सीमित हैं? जब भाजपा के अपने दिग्गजों पर ऐसे गंभीर भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगते हैं, तो ये एजेंसियां अचानक 'मौन व्रत' क्यों धारण कर लेती हैं?

भाजपा का 'डिफेंस मैकेनिज्म': मानहानि का डर दिखाकर सच दबाना

जैसे ही ये आरोप लगे, हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया (X) पर अपनी चिर-परिचित शैली में जवाब दिया। उन्होंने इसे 'हताशा' करार दिया और 48 घंटे के भीतर मानहानि का दावा करने की धमकी दी। भाजपा की यह पुरानी कार्यशैली रही है - जब भी कोई ठोस सबूत के साथ आपके काले कारनामों को उजागर करे, तो उसे कानूनी पचड़ों में फंसाने की धमकी दो।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह अक्सर 'भ्रष्टाचार मुक्त भारत' का नारा बुलंद करते हैं। लेकिन जब उनकी अपनी पार्टी के एक मुख्यमंत्री की पत्नी पर विदेशी नागरिकता और अकूत विदेशी संपत्ति के आरोप लगते हैं, तो वे चुप्पी साध लेते हैं। क्या 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' और 'मेक इन इंडिया' की आड़ में भाजपा नेताओं के परिवार 'विदेश में बसो और संपत्ति बनाओ' का अभियान चला रहे हैं?

मोदी-शाह की जोड़ी और दोहरा मापदंड

यह वही भाजपा है जो विपक्षी नेताओं के खिलाफ बिना किसी ठोस सबूत के 'भ्रष्ट' होने का ढिंढोरा पीटती है। प्रधानमंत्री मोदी मंचों से चिल्लाकर कहते हैं कि "सारे चोर एक हो गए हैं", लेकिन क्या वे अपने बगल में बैठे उन नेताओं को देख पा रहे हैं जिनके तार विदेशी पासपोर्ट और शेल कंपनियों से जुड़े हैं? अमित शाह, जो देश की आंतरिक सुरक्षा के जिम्मेदार हैं, उन्हें यह जवाब देना चाहिए कि एक राज्य के मुख्यमंत्री की पत्नी की नागरिकता की जांच अब तक क्यों नहीं हुई? क्या नियम और कानून केवल आम आदमी के लिए हैं?

लोकतंत्र के लिए खतरा

पवन खेड़ा ने जो तीन पासपोर्ट दिखाए हैं, वे केवल कागज़ के टुकड़े नहीं हैं, बल्कि भाजपा के नैतिक पतन के दस्तावेज़ हैं। अगर भाजपा को लगता है कि ये आरोप गलत हैं, तो उन्हें मानहानि की धमकी देने के बजाय एक निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। लेकिन हम जानते हैं कि ऐसा नहीं होगा। क्योंकि भाजपा की वॉशिंग मशीन में जाने के बाद हर दाग़ धुल जाता है।

असम की जनता और देश की जनता को यह समझना होगा कि जो नेता दिन-रात देशभक्ति का पाठ पढ़ाते हैं, उनके अपने घरों में देश के प्रति कितनी वफ़ादारी है। यदि हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के पास वाकई विदेशी पासपोर्ट हैं, तो उन्हें एक पल भी पद पर रहने का अधिकार नहीं है। और यदि मोदी सरकार इस पर चुप रहती है, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि उनका राष्ट्रवाद केवल एक चुनावी ढकोसला है।

भारत की राजनीति अब उस दौर में पहुँच गई है जहाँ 'सत्ता' ही अंतिम सत्य है और 'नैतिकता' महज़ एक शब्द। लेकिन सवाल तो पूछे जाएंगे, और जनता को जवाब देना ही होगा।

- Abhijit

06/04/2026